मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान, ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं

मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कर दिया है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को कहा कि इस बार भी ब्याज दरों में कई बदलाव नहीं किया जाएगा. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने ब्याज दरों में इस बार भी किसी भी तरह के बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। रेपो रेट को चार फीसदी और रिवर्स रेपो रेट को 3.35 फीसदी रखा गया है। ख़ास बात यह है कि यह लगातार 11 वीं बैठक है जिसमें ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और मॉनेटरी पॉलिसी का रूख एकोमोडेटिव रखा गया है।

क्या होती है मॉनेटरी पॉलिसी?

मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) यानी मौद्रिक नीति आर्थिक नीति का मांग पक्ष है जो देश के केंद्रीय बैंक द्वारा मनी सप्लाई को नियंत्रित करने और वृहद आर्थिक लक्ष्यों, जो सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं, को अर्जित करने के लिए उठाये गए कदमों को संदर्भित करती है।

मुख्य बातें

  • मॉनेटरी पॉलिसी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा मनी सप्लाई को नियंत्रित करने और सतत आर्थिक विकास को अर्जित करने के लिए उठाये गए कदमों को संदर्भित करती है।
  • मॉनेटरी पॉलिसी को व्यापक रूप से विस्तार या संकुचन के रूप में वर्गीेकृत किया जा सकता है।
  • इसके टूल्स में ओपेन मार्केट परिचालन, बैंकों को प्रत्यक्ष लेंडिग, बैंक रिजर्व आवश्यकता, अपारंपरिक आपात लेंडिंग कार्यक्रम और बाजार अपेक्षाओं को प्रबंधित करना-जो केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता के अधीन है, शामिल है।

ऐसे समझें मॉनेटरी पॉलिसी

मॉनेटरी पॉलिसी केंद्रीय बैंक, करेंसी बोर्ड या देश के अन्य सक्षम मौद्रिक प्राधिकरण जो अर्थव्यवस्था में मनी की मात्रा को नियंत्रित करते हैं और ऐसे माध्यमों जिनके द्वारा नए धन की आपूर्ति की जाती है, द्वारा बनाई गई कार्य योजनाओं की ड्राफ्टिंग, घोषणा औ कार्यान्वयन की प्रक्रिया है। मॉनेटरी पॉलिसी में मनी सप्लाई और ब्याज दरों का प्रबंधन शामिल होता है जिसका लक्ष्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना, उपभोग, विकास और लिक्विडिटी जैसे वृहद आर्थिक उद्देश्यों को पूरा करना है। इसे ब्याज दरों को संशोधित करने, सरकारी बॉन्डों की खरीद या बिक्री करने, विदेशी मुद्रा विनिमय दरों को रेगुलेट करने और बैंकों द्वारा रिजर्व के रूप में रखी जाने वाली राशि को परिवर्तित करने जैसे कदमों द्वारा अर्जित किया जाता है।

महत्वपूर्ण है कि केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2022-23 की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया है। फरवरी में हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.8 फीसदी जताया गया था। इस पर गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 16.2 फीसदी रहने का अनुमान है। दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 4.1 फीसदी और चौथी तिमाही में 4 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रहने का अनुमान है।

वित्त वर्ष 2022-23 के लिए रिजर्व बैंक ने महंगाई का अनुमान 4.5 फीसदी से बढ़ाकर 5.7 फीसदी कर दिया है। पहली तिमाही में 6.3 फीसदी, दूसरी तिमाही में 5 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.4 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.1 फीसदी रहने का अनुमान है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के सभी सदस्यों ने एकमत से ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के बढ़ाने के लिए ऐसा किया गया है।

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर सभी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से कर्ज लेते हैं। बैंकों द्वारा इस कर्ज का उपयोग आगे बैंकों द्वारा लोगों को होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, आदि देने के लिए किया जाता है। वर्तमान में आरबीआई द्वारा निर्धारित रेपो रेट 4 प्रतिशत है। रिवर्स रेपो रेट जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है यह रेपो रेट का बिल्कुल उल्टा होता है रिवर्स रेपो रेट के तहत सभी बैंक अतिरिक्त पूंजी को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास जमा कराते हैं।

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