कांग्रेसी कलह और मियाँ हुजूर की चिंता

कांग्रेसलुटियन ज़ोन में एक बंगले का हरा-भरा लॉन। चच्ची और मियाँ हुजूर सुबह-सुबह चाय की चुस्कियों में कुछ यूँ मशगूल रहे कि उन्हें एक-दूसरे का भी ख्याल नहीं रहा।

फिर चाय ख़त्म होते ही चच्ची सक्रिय हुईं और बोलीं-मियाँ हुजूर चाय आपने बहुत चटोरी टाइप बनाई। मियाँ बोले-देखो बेगम-दूसरी चाय मैं नहीं बनाने वाला। अगर आपको पीनी है तो बनाकर ले आइये और अपने शौहर को भी पिलाइये। आपके साथ चाय पीने का आनंद ही कुछ और है। तब तक मै जरा कुछ कांग्रेसियों की खैर-खबर ले लूँ। लुटिया डुबोये जा रहे हैं। किसी को शायद चिंता ही नहीं कि देश को एक मजबूत विपक्ष भी चाहिये।

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मियाँ हुजूर ने लगा दिया फोन एक पुराने कांग्रेसी दोस्त को…बोले-अमाँ यू बताओ। काहे कांग्रेस की बैंड बजाने पर तुले हुये हो। समझाते क्यों नहीं मैडम को। उधर से फोन पर लड़खड़ाती हुई आवाज आई-क्या बताऊँ, मियाँ हुजूर। अब कांग्रेस पहले वाली नहीं रही। न इंदिरा-राजीव जी रहे न ही पुरानी मैडम। अब तो बुढ़ापे में हम नयी कांग्रेस देख रहे हैं, जो बिना वजह फूलकर कुप्पा हुई जा रही है।

कांग्रेस

 पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ बड़ी मुश्किल से बचे हुये थे, लगता है कि अब इनकी भी बारी है…न जाने क्या होगा? मैं तो कन्फ्यूज हूँ। मैडम भी अब बदली-बदली सी दिखती हैं। बाबा अपनी अलग धुन में रहते हैं। दीदी का राग भी अलग है। पुराने चावल एक-एक कर खुदा को प्यारे हो रहे हैं। पर, मैडम पुत्र मोह से बाहर आने को तैयार नहीं हैं।

मुझे याद है देश की एक बड़ी आबादी कांग्रेस प्रमुख को विदेशी कहते हुये नहीं थकती थी। एक समय तो यह विरोध बहुत तेज था, जब लोगों को लग रहा था कि वे पीएम बन जाएँगी। खैर, उन्होंने पीएम पद स्वीकार नहीं किया और ख़ुशी-ख़ुशी मनमोहन सिंह को पीएम बना दिया। उस समय कुछ दिन तक लोगों ने उनमें एक त्यागी महिला देखी। यह और बात है कि यूपीए चेयरमैन के रूप में सत्ता की कुंजी उन्हीं के हाथ में रही। 10 वर्ष तक लगातार यह क्रम चला।

उस जमाने में यूपीए प्रमुख के सुपुत्र, संसद सदस्य राहुल गांधी कभी सरेआम आर्डिनेंस फाड़ते हुये देखे गये तो कभी मनमोहन सिंह के फैसलों पर सवाल उठाते मिले। उस दौरान बहुत किरकिरी कराई उन्होंने। अरे भाई, कोई बात थी तो घर के अंदर बैठकर सुलटा लेते। पार्टी और सरकार की बैंड बजाने की क्या जरूरत थी?

पर उन्हें कौन समझाये? देखते ही देखते कांग्रेस ख़त्म सी होने को है। चुनाव में पंजाब का परिणाम क्या होगा, कोई नहीं जानता। चुनाव के ठीक पहले कैप्टन को हटाने के बाद भी कलह रुकी नहीं और रुकेगी भी नहीं। चुनाव जो सिर पर है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी इन दिनों विरोधियों के हौसले बुलंद हैं।

दोनों ही राज्यों में मुख्यमंत्रियों के खिलाफ माहौल बनाने वाले जुटे हुये हैं…कभी देश पर एक क्षत्र राज करने वाली कांग्रेस दिन-ब-दिन सिमटती जा रही है। या यूँ कहें सिकुड़-सिमट कर रहठा जैसी हो चली है। यह कहते हुये उनका गला रूँध गया। बोले-हे भगवान! अब मुझे भी बुला लो।

मियाँ हुजूर ने कहा-बहुत चिरकुट हो तुम। इतने कमजोर तो तुम कभी रहे नहीं। उठो, लड़ो और अपनी पार्टी को खड़ा करो। ढेरों कमजोरियों के बावजूद कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है, जो देश के हर हिस्से तक दखल रखती है। जवाब आया-तुम सही फरमा रहे लेकिन अब कार्यकर्ता नहीं हैं। सब नेता हो चले हैं। संघर्ष की क्षमता समाप्त सी हो चली है। मियाँ हुजूर बोले-सहमत लेकिन देश को एक मजबूत विपक्ष भी चाहिये। नहीं तो कौन दिखाएगा सत्तापक्ष को आइना? तुम्हीं सोचो।

(लेखक 30 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं। ‘हिन्दुस्तान’ अखबार में कई केन्द्रों पर संपादक रहे हैं। )