नेताओं के चक्कर में न पड़ो… महंगाई तो बढ़ेगी ही

मियाँ हुजूर

मियाँ हुजूर आजकल गजब चिंता में डूबे हुये हैं। कब्र में टांग लटकी हुई है लेकिन कहते हैं कि मैं तभी दुनिया छोडूँगा जब पेट्रोल का दाम 200 रूपये लीटर हो जायेगा। बड़े अरमान हैं उनके। पोते ने सेहत का ख्याल रखने का सुझाव दिया तो डंडा लेकर दौड़ पड़े उसके पीछे। तनिक दूर जाकर गिरे और कमर में मोच आ गयी। वो तो खुदा का शुक्र कि हड्डियाँ नहीं टूटीं।

पोते ने ही उठाया। दर्द से कराहते रहे लेकिन उसे पीटते रहे। बोले… तुमसे हम बहुत गुस्से में हैं। बुढ़ापे में मुझे दौड़ा दिया। अब भुगतो। न जाने कौन सी हड्डी की बैंड बजी है। पोते ने कहा-चुप करो दादाजी। कुछ नहीं हुआ है। बस तनिक दर्द है। अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मैं मरहम लगा दूँगा। सब दर्द छू मंतर हो जाएगा। मियाँ हुजूर बोले- हाँ ठीक रहेगा। वैसे भी पेट्रोल बहुत महंगा हो गया है। रोज दाम बढ़ रहे हैं- पोते ने कहा।

यह भी पढ़ें- यूं तो बेड़ा गर्क न करो यारों…

मियाँ हुजूर ने डपटा। बोले- गुलाम भारत में पैदा हुआ। बड़ा हुआ तो देश आजाद था। पेट्रोल तब बहुत सस्ता था। पर, लोगों के पास गाड़ियाँ नहीं थीं। अब आज देखो-पेट्रोल महंगा है लेकिन तुम्हारे पास तीन गाड़ियाँ हैं। इसका मतलब यह हुआ कि सस्ता- महंगा केवल दिमागी फेर है। कोई चीज बहुत सस्ती हो और हम उपयोग न कर सकें। कोई चीज बहुत महंगी हो और हम खुल्ला इस्तेमाल कर सकें तो सच्चाई क्या हुई?

अरे भैया, यू समझो कि आजादी के बाद सड़कों का जाल बढ़ा। सुविधाएं बढ़ी। अस्पताल, स्कूल, कॉलेज बढ़े। देश कहाँ से कहाँ पहुँच गया। जिस घर में साइकिल तक न थी, वहाँ बड़ी-बड़ी कारें उपलब्ध हैं। वर्ष 1970 की बात है। तुम्हारी बुआ के निकाह में फूफा को स्कूटर देने का मन हुआ। बजाज चेतक पूरे एक साल की बुकिंग पर मिल रही थी। अब देना था तो ब्लैक में लिया पांच सौ ऊपर देकर। क्या समझे।

अरे नहीं दादा जी, सरकार फेल है। हर चीज महंगी हुई जा रही है। पता है टमाटर-प्याज ने भी त्योरियां चढ़ा रखी हैं। सरसों तेल-दालें तो आसमान छू रही हैं। घर चलाना मुश्किल हो रहा है।

यह भी पढ़ें- कांग्रेसी कलह और मियाँ हुजूर की चिंता

मियाँ हुजूर बोले- सुनो एक किस्सा जो तुम्हारी परदादी मुझे सुनातीं थीं। एक व्यापारी था। उसके बेटे ने बकरी खरीदने की जिद की। उस समय व्यापारी की जेब में एक रुपया था और बकरी डेढ़ रूपये की थी। उसने बेटे से कहा कि इस बार व्यापार करके लौटूंगा तो दो बकरी खरीदूँगा। बेटा मान गया। छह महीना बीता। व्यापारी लौटा और बेटे की ख़ुशी के लिए पाँच बकरी एक साथ ले आया। और कीमत दी 15 रूपये। संदेश यह है कि जब हमारे पास खाने को रोटी न हो तो छोटी सी चीज भी महंगी लगती है और जेब में पैसा हो तो बड़ी वाली कार भी सस्ती। कुछ समझे या नहीं बुद्धू लाल।

… जी दादाजी।

इन नेताओं के चक्कर में न पड़ो। समय जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा तो चीजें भी महंगी होंगी। इस सरकार में भी महंगाई का शोर है, उस सरकार में भी महंगाई का शोर था। जनता तब भी परेशान थी, जनता अब भी परेशान है। गरीब तब भी थे। अब भी हैं। अमीरों के बच्चे तब भी विदेश पढ़ने जाते थे, अब भी जाते हैं। इसलिए तुम नेताओं के चक्कर में तो न ही पड़ो। मेहनत करो। पैसे कमाओ। खूब खर्च करो। एक सरदार जी मेरे दोस्त हैं। कहते हैं- पैसा आये तो खर्च जरूर करो। तभी और कमाने की भूख बढ़ेगी। पैसा जब मार्किट में रहेगा तो देश का भी भला होगा। और हाँ तुम ये समझ लो- मैं तो पेट्रोल के दाम दो सौ रूपये लीटर देखना चाहता हूँ। उसके बिना दुनिया छोड़ने वाला नहीं हूँ। क्या समझे।

(लेखक 30 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं। ‘हिन्दुस्तान’ अखबार में कई केन्द्रों पर संपादक रहे हैं।)

2 thoughts on “नेताओं के चक्कर में न पड़ो… महंगाई तो बढ़ेगी ही

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *