वैक्सीनेशन की शुरुआत और इसके असर के बारे में क्या आपको है जानकारी

Report by Deepanshi Sharma.

कोरोना जैसी बीमारी आने के बाद से इसके बचाव के लिए वैक्सीनेशन यानि टीकाकरण (vaccination) का सिलसिला दुनिया भर में जारी है। भारत में भी वैक्सीनेशन जोर शोर से जारी है। इससे कोरोना बीमारी की भयावहता पर काफी नियंत्रण भी पाने में सफलता मिली है। कोरोना की तरह ही कई अन्य बीमारियों से भी वैक्सीनेशन यानि टीकाकरण (corona vaccination) के द्वारा ही छुटकारा मिला, उनसे बचाव हो सका। चेचक (smallpox), पोलियो और टिटनेस (polio, tetanus) जैसे रोगों से छुटकारा दिलाने में टीकाकरण ने ही कामयाबी दिलवाई थी। इन्हीं रोगों को दूर करने के लिए टीकाकरण की शुरुआत हुई थी। आज हम सभी इसी बारे में जानेंगे कि टीकाकरण यानि वैक्सीनेशन क्या होता है? वैक्सीन क्या होती है? यह कैसे असर करती है।

वैक्सीनेशन की शुरुआत ऐसे हुई थी

चेचक दुनिया की पहली बीमारी थी, जिसके टीके की खोज 1976 में हुई थी। अंग्रेज चिकित्सक एडवर्ड जेनरवह ने चेचक के टीके का आविष्कार किया था। एडवर्ड जेनरवह एक बहुत ही प्रसिद्व चिकित्सक थे। विश्व में इनका नाम इसलिए भी प्रसिद्ध है कि इन्होंने चेचक के टीके का आविष्कार किया था। जिसकी वजह से आज करोड़ों लोग चेचक जैसी घातक बीमरी से ठीक हो रहे हैं। ठीक इसी तरह रेबीज भी एक ऐसी बीमारी है, जिसका संक्रमण जानलेवा होता है। फ्रेंच वैज्ञानिक लुई पाश्रर ने रेबीज के टीके का सफल आविष्कार किया था। उनकी इसी खोज ने मेडिकल की दुनिया में क्रांति ला दी और लोगों को एक बड़े संकट से बचा लिया था। उन्होंने इतिहास में डिप्थेरिया, टिटनेस, एंथ्रेक्स, हैजा, प्लेग, टाइफाइड, टीबी समेत कई महामारी के लिए टीके विकसित किए थे।

अगर ये टीके नहीं बनते तो दुनिया की आधी से ज्यादा लोगों की संख्या इसके अभाव में मारी जा चुकी होती। ऐसे में देखा जाए तो टीके का बहुत महत्व है। वहीं दूसरी ओर कोरोना को लेकर अब तक कई प्रयास दुनियाभर में किए गए। लेकिन जब कोई सफलता ही नहीं मिली तो टीकाकरण का ही रुख करना पड़ा।

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आखिर होती क्या है वैक्सीन

वैक्सीन वो है जो आपके शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है। वैक्सीन में किसी जीव के कुछ कमज़ोर या निष्क्रिय अंश होते हैं जो बीमारी का कारण बनते है। वैक्सीन शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ यानी आक्रमणकारी वायरस की पहचान करने के लिए प्रेरित करती हैं और उनके ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी तैयार करती हैं जो बाहरी हमले से लड़ने में हमारे शरीर की मदद करती हैं। अमेरिका के सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन का कहना है कि वैक्सीन बहुत ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं क्योंकि ये अधिकांश दवाओं के विपरीत, किसी बीमरी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि उन्हें होने से रोकती हैं। सीडीसी का कहना है कि बाज़ार में लाये जाने से पहले वैक्सीन की गंभीरता से जॉच की जाती है। पहले प्रयोगशालाओं में और फिर जानवारों पर इनका परीक्षण किया जाता है। इसके बाद ही मनुष्यों पर वैक्सीन का ट्रायल होता है। टीकाकरण में कुछ जोखिम ज़रूर हैं, लेकिन सभी दवाओं की ही तरह, इसके फ़ायदों के सामने वो कुछ भी नहीं।

क्या कोविड-19 की तरह और भी वैक्सीन हैं

कोरोना-वैक नामक टीका चीन की दवा कंपनी सिनोवैक ने बनाया है। कंपनी ने इस टीके को बनाने में तरह-तरह के तरीक़े का इस्तेमाल किया है। कंपनी के अनुसार, इस टीके को बनाने के लिए वायरस के निष्क्रिय अंशों का इस्तेमाल किया गया। यह कितना प्रभावी है, इसे लेकर काफ़ी सवाल भी उठ रहे हैं। भारत में कई वैक्सीन दी जा रही हैं। कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया। दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन। रूस ने अपनी ही कोरोना वैक्सीन तैयार की है जिसका नाम है ‘स्पूतनिक-V’ और इसे वायरस के वर्ज़न में थोड़ बदलाव लाकर तैयार किया गया। इस वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल किया जा रहा है। मॉडर्ना वैक्सीन को भी भारत में इस्तेमाल करने की मंज़ूरी दी गई हैं।

कोविड-19 वैक्सीन क्यों है जरूरी

वैज्ञानिकों ने स्टडी की जिसमें दावा किया गया है कि वैक्सीन लेने वाले लोगों की इम्युनिटी काफी बढ़ जाती है। कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच यह एक अच्छी खबर है। एक्सपर्ट के अनुसार, जो लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं और उन्होंने इसकी वैक्सीन की पहली डोज लगवा ली है, उनमें कोविड-19 से लड़ने की क्षमता आ जाती है और दोबारा संक्रमित होने का खतरा बेहद कम हो जाता हैं। वही दूसरी ओर युवा हो या बुजुर्ग दोनों को घातक कोरोनावायरस से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाना जरूरी बताया जा रहा हैं। है। यह मानदंड सही है कि अधिक उम्र वाले व्यक्ति को पहले टीका लगाया जाए क्योंकि उनकी इम्युनिटी युवाओं की तुलना में बेहद कम होती है। यह महत्वपूर्ण है कि हमें अपने कम्युनिटी में सबसे पहले कमजोर लोगों को वैक्सीन लगवानी चाहिए जिन्हें इसकी अत्यधिक जरूरत है। हालांकि, सरकार की तरफ से भी ऐसे ही निर्देश दिए गए हैं।

(Deepanshi is student of MA-JMC first year from Maharishi University Of Information Technology, Noida)

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