मुख्य धारा की मीडिया को कोसने की बजाय सोशल मीडिया पर रखें नजर

  • “मीडिया, कानून और समाज : अंतरसंबंध एवं उभरता परिदृश्य” विषय पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
  • विद्वानों ने कहा कि पारम्परिक मीडिया अच्छा काम कर रहा है, न्यू मीडिया ने मचा रखा है घमासान

नोएडा। “मीडिया, कानून और समाज : अंतरसंबंध एवं उभरता परिदृश्य” (मीडिया, लॉ एंड सोसाइटी : इंटररिलेशंस एंड इमर्जिंग ट्रेंड्स) विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन महर्षि स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन द्वारा महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी परिसर में शनिवार को किया गया। कार्यशाला में मीडिया के विभिन्न माध्यमों में आये बदलाव, उनका समाज पर असर और न्यायपालिका की भूमिका पर चर्चा की गई। विद्वानों ने इस बात को स्वीकार कि मीडिया के सामने अब कई तरह की चुनौतियाँ हैं। सोशल मीडिया ने पूरे सामाजिक परिदृश्य को बदल दिया है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में महर्षि यूनिवर्सिटी नोएडा कैम्पस के डीन एकेडमिक्स अजय कुमार, आईआईएमसी, नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, राजस्थान यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर मास कम्युनिकेशन के पूर्व हेड प्रो. संजीव भनावत और महर्षि यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर (प्लानिंग एंड इम्प्लीमेंटेशन) दिनेश पाठक। (बाएं से दाएं)

कार्यशाला में उद्घाटन सत्र के मुख्य वक़्ता आईआईएमसी, नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि अब मीडिया बहुत आगे बढ़ चुका है। बहुत कुछ बदल चुका है। मीडिया अब सिर्फ मुख्य धारा का पारंपरिक मीडिया ही नहीं रह गया है। सोशल मीडिया पूरी तरह से हावी हो चुका है। सोशल मीडिया माध्यमों से लाखों करोड़ों फ़ोटो रोज देखे और शेयर किए जा रहे हैं। करोड़ों वीडियो रोज देखे जा रहे हैं। लोग बात-बात पर मुख्य धारा की मीडिया को कोसते हैं। जबकि सोशल मीडिया के यूजर्स तीन अरब से ज्यादा हैं। अब कम्युनिकेशन की दुनिया सोशल मीडिया यूजर्स के हाथों में है। अब परम्परागत मीडिया उतना पावरफुल नहीं रहा। लोगों को मीडिया साक्षर बनाये जाने की जरूरत है। लोगों को फेक न्यूज़ और पेड न्यूज में फर्क जानना होगा। हमें मुख्य धारा की मीडिया को कोसने की बजाय सोशल मीडिया पर जो घमासान मचा है, उस पर निगाह रखने की जरूरत है।

नेशनल कांफ्रेंस में गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ लॉ एंड लीगल स्टडीज के डीन प्रो. (डॉ.) अमर पाल सिंह ने ऑनलाइन जुड़कर लोगों को संबोधित किया।

समापन सत्र के मुख्य वक्ता माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (म.प्र.) के कुलपति प्रो. के.जी. सुरेश ने डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उससे उभरी चुनौतियों के बारे में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार सबको है। मगर अभिव्यक्त क्या किया जाना है, इस पर नजर रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया के माध्यम से कई आंदोलन सफल हुए हैं। इसका उपयोग सही लोगों द्वारा और सही तरीके से किये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जो भी लोग मीडिया के किसी भी माध्यम से जुड़े हैं, उनके लिए मीडिया की शिक्षा ग्रहण करना बहुत जरूरी है। जिस प्रकार से डॉक्टर, इंजीनियर अपने क्षेत्र की उचित पढ़ाई और ट्रेनिंग करते हैं। उसी तरह मीडिया से जुड़े लोगों के लिए भी मीडिया की पढ़ाई जरूरी है। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। जनता को इससे बहुत आशाएं हैं।

कॉन्फ्रेंस के टेक्निकल सेशन में विद्वानों ने मीडिया और लॉ विषय पर गहन चिंतन किया।

महर्षि यूनिवर्सिटी के चांसलर अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि हर जर्नलिस्ट को कानून की जानकारी होना बहुत जरूरी है ताकि पत्रकार जो भी लिखे उसका समाज पर क्या असर होगा, यह उसे पता होना चाहिए। ऐसे कानून होने चाहिए जो इस बात पर नजर रखें कि किसी को कुछ भी या ऐसा गलत बोलने से रोकें जो समाज की शांति को भंग करे। श्री अजय प्रकाश ने कहा कि हमारे देश में रिसर्च पर जोर दिए जाने की जरूरत है। अच्छे और नए विषयों पर रिसर्च हो। नई शिक्षा नीति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे स्टूडेंट्स का भविष्य संवरेगा।

कॉन्फ्रेंस में बेस्ट पेपर प्रेजेंट करने का अवार्ड मनु कौशिक ने जीता। चांसलर अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने मनु को पुरस्कृत किया।

महर्षि यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. बीपी सिंह ने कहा कि यह दौर नई तकनीक को सीखने और अपनाने का है। मीडिया के क्षेत्र में भी बहुत से नए बदलाव आए हैं। ये बदलाव सार्थक हैं और इनसे कई तरह की चुनौतियां भी सामने आयी हैं।

कॉन्फ्रेंस में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।

चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ के तिलक स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन के डायरेक्टर प्रो. प्रशांत कुमार ने पत्रकारिता के इतिहास के दौर से आज के मौजूदा परिदृश्य की चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूरी दुनिया का माहौल बदल चुका है। अब तो मोबाइल जर्नलिज्म का जमाना है। ऐसे में हमें अपने पाठ्यक्रम को भी नई तकनीक से जोड़ना होगा। नई टेक्नोलॉजी को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा।

महर्षि यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर जनरल प्रो. ग्रुप कैप्टन ओपी शर्मा ने सोच सकारात्मक रखने की बात पर जोर दिया।

महर्षि यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर जनरल प्रो. ग्रुप कैप्टन ओपी शर्मा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अब समस्याओं के समाधान की तरफ सोचना है। सोच सकारात्मक रखनी होगी। सार्थक मुद्दों के लिए काम करना चाहिए।

गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ लॉ एंड लीगल स्टडीज के डीन प्रो. (डॉ.) अमर पाल सिंह ने कहा कि मीडिया महत्वपूर्ण रोल प्ले करता है। तमाम बातें मीडिया को लेकर की जाती हैं लेकिन मीडिया लोकतांत्रिक देश के लिए महत्वपूर्ण है। मीडिया का असर हर फील्ड में है। आजकल पेड न्यूज, फेक न्यूज़ जैसी चुनौतियां हैं। मगर हम इन सबसे भी हम जूझ कर आगे निकलेंगे।

कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र की शुरुआत गुरु पूजन के साथ हुई।

राजस्थान यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर मास कम्युनिकेशन के पूर्व हेड प्रो. संजीव भनावत ने कहा कि महर्षि विश्विद्यालय में मूल्यपरक और आध्यात्म से जुड़ी शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिल रहा है। किसी भी समाज के लिए विधि सम्मत समाज की आवश्यकता होती है। मीडिया इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आम आदमी ने मीडिया को लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में स्वीकार किया है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर मीडिया निगाह रखता है। ये सभी जब मिल कर जिम्मेदारी से काम करते हैं तभी स्वस्थ्य लोकतंत्र का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति को लेकर कई तरह की बातें और आरोप लगने लगे हैं। लेकिन जब भी कोई नई तकनीक आती है तो कई तरह के खतरे और चुनौतियां सामने आती हैं। न्यायपालिका अक्सर तमाम विषयों पर टिप्पणी करती है। सरकार अपने हिसाब से काम कर रही है। हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। आम आदमी की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी संस्थाएं काम कर रही हैं।

कॉन्फ्रेंस में शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया।

लॉयड इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ग्रेटर नोएडा के सीनियर डायरेक्टर डॉ. राजीव अग्रवाल ने अपने संबोधन में मीडिया में डिजिटल माध्यमों के बढ़ते दखल के बारे में कहा कि इससे मीडिया का दायरा बढ़ा है। मीडिया की पहुंच प्रत्येक व्यक्ति तक हो गई है। अब हर क्षेत्र में टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि इस टेक्नोलॉजी का सही उपयोग किये जाने की जरूरत है।

टेक्निकल सेशन में शामिल अतिथि और फैकल्टी मेम्बर्स।

कॉन्फ्रेंस के टेक्निकल सेशन में पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस वीएन सिन्हा, दिल्ली यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ लॉ की प्रो. पिंकी शर्मा, गलगोटिया यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा के मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की प्रो. ताशा सिंह परिहार, एमिटी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ कम्युनिकेशन की डॉ. रूही लाल, निस्कोर्ट मीडिया मीडिया कॉलेज, गाजियाबाद की प्रिंसिपल डॉ. ऋतु दुबे तिवारी और जेसी बोस यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, वाईएमसीए फरीदाबाद के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन सिंह मलिक के सामने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किये गए।

समापन सत्र के बाद ग्रुप फोटो

महर्षि यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर (प्लानिंग एंड इम्प्लीमेंटेशन) श्री दिनेश पाठक ने उद्घाटन सत्र में सभी अतिथियों का स्वागत किया। महर्षि यूनिवर्सिटी नोएडा कैम्पस के डीन एकेडमिक्स अजय कुमार ने दोनों सत्रों में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

सेमिनार का संयोजन और संचालन महर्षि स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. दीपिका वर्मा ने किया।

सेमिनार का संयोजन महर्षि स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. दीपिका वर्मा ने किया। इस मौके पर महर्षि यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों के डीन, फैकल्टी मेम्बर्स एवं अन्य सदस्य मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *