श्री सहस्रचंडी महायज्ञ एवं रुद्राभिषेक के जरिये विश्व में शांति-सद्भाव की कामना

  • महर्षि महेश योगी संस्थान द्वारा प्रयागराज के संगम तट पर धार्मिक आयोजन
  • रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध न होने की प्रार्थना, जनकल्याण के लिए जुटे प्रकांड विद्वान

प्रयागराज। यज्ञ की पवित्र अग्नि में लगातार पड़ती आहुतियाँ, वैदिक पंडितों द्वारा उच्चारित किये जा रहे मंत्रों की गूँज और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने प्रयागराज स्थित संगम तट पर धर्म और आध्यात्म का पावन वातावरण स्थापित कर रखा है। यहाँ स्थित महर्षि आश्रम में विश्व शांति के लिए श्री सहस्रचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। 133 महर्षि वैदिक पंडित इस महायज्ञ के द्वारा यह प्रार्थना कर रहे हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध न हो तथा दुनिया में शांति, सद्भाव और भाईचारा कायम रहे।

महर्षि महेश योगी संस्थान द्वारा इसी उद्देश्य से यहाँ रुद्राभिषेक महायज्ञ का भी आयोजन किया जा रहा है। इस रुद्राभिषेक में 121 महर्षि वैदिक पंडित संकल्प लेकर जनकल्याण की कामना कर रहे हैं।

महर्षि महेश योगी संस्थान द्वारा आयोजित इन धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विशिष्टजनों की निरंतर सहभागिता बनी हुई है। सभी यज्ञ में सम्मिलित होकर दुनिया को युद्ध की विभीषिका से बचाने और शांति कायम रखने का आह्वान कर रहे हैं।

प्रयागराज के संगम तट स्थित महर्षि आश्रम में इन पावन आयोजनों के विषय में महर्षि महेश योगी संस्थान के प्रमुख श्री अजय प्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि महर्षि जी की प्रेरणा से यह आयोजन किया जा रहा है। वे भी दुनिया में शांति-सद्भाव के लिए अक्सर यज्ञ किया करते थे। महर्षि जी की उसी परंपरा को आगे ले जाने का काम संस्थान कर रहा है।

हम सब जानते हैं कि महर्षि महेश योगी जीवन पर्यंत पूरे विश्व में शांति, प्रेम और सद्भावना का प्रचार-प्रसार करते रहे। उनके भावातीत ध्यान (ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन) को पूरी दुनिया ने अपनाया क्योंकि ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन से मन स्थिर और शांत होता है। भटकाव रुक जाता है। ह्रदय में अच्छे विचार और सकारात्मकता आती है।

नवम्बर माह में भी राष्ट्र की समृद्धि, शांति और विकास के उद्देश्य से नोएडा स्थित महर्षि वैदिक परिसर में श्री विष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ का आयोजन किया गया था। इसमें देश भर से प्रकांड विद्वानों ने सम्मिलित होकर विश्व कल्याण की कामना की थी।

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