श्री विष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ : प्रत्येक आहुति के साथ यहां पूरी हो रही है मनोकामना

  • अजय कश्यप।

चहुं दिशाओं में मंत्र गूंज रहे हैं। आहुतियां डाली जा रही हैं। पुरोहितगण अनुष्ठान करवा रहे हैं। यज्ञ हो रहा है। धर्म ध्वजाएं लहरा रही हैं। पताकाएं फहरा रही हैं। देश भर से प्रकांड विद्वान एकत्रित हैं। पूजा हो रही है। मनन हो रहा है। चिंतन हो रहा है। चर्चा हो रही है… “श्री विष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ” जैसे आयोजन हमारी संस्कृति और धर्म की जड़ों को मजबूत करते हैं। संस्कारों को बढ़ावा देते हैं। मानवता का विकास करते हैं। ऐसे आयोजन साल भर अनवरत चलें तो क्या खूब रहे..। इन्हीं चर्चाओं के मध्य यज्ञशाला में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। नोएडा सेक्टर 110 स्थित महर्षि वैदिक परिसर (गेट नम्बर 8) पूरी तरह से धर्म नगरी में परिवर्तित हो चुका है। धर्म और ज्ञान की गंगा बह रही है। श्रद्धालु आनंदित और आल्हादित हैं। सृष्टि के पालनकर्ता विष्णु भगवान की उपासना में सभी लीन हैं। अलग-अलग देवताओं का आह्वान किया जा रहा है। एक ही कामना है… ईश्वर सबका कल्याण करें। इसी कामना के साथ यज्ञशाला में आहुतियों का सिलसिला और गतिमान होता जाता है।

सृष्टि के पालनकर्ता विष्णु भगवान की उपासना में सभी लीन हैं।

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यज्ञशाला की छटा निराली है। गंगाजल से पूर्ण 100 कलश सुशोभित हैं। साढ़े चार फिट लंबाई, चौड़ाई और गहराई वाला प्रदान हवन कुंड प्रतिदिन पड़ने वाली 1008 से ज्यादा आहुतियों से दैदीप्यमान है। पंडित, पुजारी और पुरोहितगण विधि विधान से कार्यक्रम संचालित करा रहे हैं। महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट द्वारा आयोजित महायज्ञ का उद्देश्य राष्ट्र की समृद्धि, शांति और विकास है। यज्ञ में भक्तों की भीड़ उद्देश्य को सार्थक बना रही है। संकल्प लिए जा रहे हैं।

पुरोहितगण विधि विधान से समस्त अनुष्ठान करवा रहे हैं।

आहुतियों, स्वाहा व हवन कुंड के गूढ़ मायने

इस भव्य, दिव्य और अलौकिक महायज्ञ में आहुतियों के साथ गूंजते स्वाहा शब्द हृदय और सम्पूर्ण वातावरण को पवित्र कर रहे हैं। कर्मकांड विद्वान और वेदपाठी मनु भट्ट और आचार्य सतीश भट्ट आहुतियों, स्वाहा व हवन कुंड का अर्थ स्पष्ट करते हैं… आहुतियां तो भगवान का आहार हैं। अग्निकुंड भगवान के मुख के समान है। आहुतियों के रूप में जो ईश्वर को अर्पित किया जाता है, उससे देवता प्रसन्न होते हैं। अग्नि में आहुति देने से वह सूर्य भगवान को पहुंचती है। सूर्य की कृपा से वर्षा भी होती है। मिट्टी में नमी पहुंचती है। जमीन उपजाऊ होती है। अन्न की उपज अच्छी होती है। राष्ट्र में समृद्धि आती है।

श्री विष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ में परिक्रमा भी की गयी।

आहुतियों के अनंत लाभ

आहुतियों के अनंत लाभ हैं। इनका वर्णन धर्मग्रंथों में उल्लिखित है। अग्नि के ताप और उसमें उपयोग होने वाली हवन की प्राकृतिक सामग्री वातावरण में फैले रोगाणुओं और विषाणुओं को नष्ट करती हैं। प्रदूषण को मिटाने में सहायक है। हवन कुंड से उठती सुगंध और ऊष्मा मन व तन की अशांति और थकान को दूर करने वाली होती है। प्रकृति के लिए भी लाभदायक है।

देश भर से प्रकांड विद्वान महायज्ञ में सम्मिलित हुए हैं।

स्वाहा का अर्थ है उचित ढंग से अर्पण

इसी प्रकार स्वाहा शब्द का उच्चारण भी अर्थपूर्ण है। हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार स्वाहा का अर्थ है सही ढंग से पहुंचाना। जरूरी पदार्थ या तत्व को उसके प्रिय तक सुरक्षित पहुंचाया जाना स्वाहा उच्चारण के माध्यम से ही संभव है। तभी तो हवन कुंड में स्वाहा कह कर ही हवन सामग्री या अर्ध्य या भोग भगवान को अर्पित करते हैं। इससे देवता प्रसन्न होते हैं।

श्री विष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ में प्रतिदिन 1008 आहुतियाँ डाली जा रही हैं।

महायज्ञ के सहभागी बनकर पुण्यलाभ अर्जित कीजिये 

“श्री विष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ” ईश्वर की आराधना के साथ ही ऐसी अनमोल जानकारियों और ज्ञानवर्धन का सशक्त माध्यम भी बना हुआ है। प्रकांड पंडितों से सीधा संवाद हो पा रहा है। जिज्ञासाएं हल हो रही हैं। मनोकामनाएं पूर्ण हो रही हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज, श्री जितेंद्र नाथ जी महाराज, अंजनगांव, सुरजी, नागपुर, महंत मिथिलेश नाथ योगी, देवीपाटन जैसे शीर्षस्थ धर्म गुरुओं के सानिध्य में संपूर्ण आयोजन संचालित है। भक्ति, ज्ञान, अध्यात्म, पूजा, अर्चना, उपासना का यह अद्भुत स्थल आपकी भी प्रतीक्षा कर रहा है। इसके सहभागी बनिये और पुण्य लाभ अर्जित कीजिये। भक्ति और अध्यात्म का यह अद्भुत वातावरण 27 नवम्बर तक अनवरत बना रहेगा। प्रातः 9.30 बजे से अपरान्ह 1 बजे तक और सांयकाल 5 से 7 बजे तक महायज्ञ के साक्षी बनने का सुअवसर सभी के लिए सहज उपलब्ध है।

महायज्ञ में गणमान्य लोगों की सहभागिता बनी हुई है।

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